ज्ञान एवं वैराग्य ही मायावीसंसार से मुक्ति का सुगम मार्ग: डा. शास्त्री

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ज्ञान एवं वैराग्य ही मायावी संसार से मुक्ति का सुगम मार्ग: डॉ. शास्त्री

ललितपुर। पुलिस लाइन स्थित मुक्तिधाम मंदिर में नवरात्र के मौके पर ब्रहृमलीन महंत दामोदरदास महाराज की पुण्य स्मृति में श्रीमद्भागवत सप्ताह ज्ञान यज्ञ का आयोजन शुरू हो गया। डा. ओमप्रकाश शास्त्री ने कहा कि ज्ञान एवं वैराग्य ही मायावी संसार से मुक्ति का सुगम मार्ग है।
संस्कृत के विद्वान डॉ. ओमप्रकाश शास्त्री ने कहा कि आध्यात्मिक, आधिभौतिक, आधिदैविक तीन प्रकार के दुखों से कलयुग में मानवीय सृष्टि पीड़ित हो रही है। ऐसे समय में श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण मात्र से मानव का कल्याण हो सकता है एवं दुखित मानवीय सृष्टि में सदभावना स्थापित हो सकती है। उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत के ज्ञान, वैराग्य एवं भक्ति के पावन आचरण से समाज में संस्कारों की स्थापना हो सकती है। आज का मानव पूर्वजों एवं ऋषियों द्वारा वर्णित जीवन जीने की कला को भूल चुका है। मानव की यही भूल विनाश का कारण बन रही है।
उन्होंने कहा कि परमात्मा तक पहुंचने हेतु ऋषियों ने ज्ञान, वैराग्य एवं भक्ति के तीन मार्गो को प्रदर्शित किया है। ज्ञान एवं भक्ति के सिद्धांतों को जीवन में अपनाकर भक्ति द्वारा भगवान की समीपता प्राप्त की जा सकती है। डॉ. शास्त्री ने गोकर्ण एवं धुंधकारी के प्रसंगों का वर्णन करते हुए कहा कि माता-पिता के संस्कारों को संतान ग्रहण करती है। माता-पिता यदि श्रेष्ठ संस्कारों वाले होंगे तो गोकर्ण जैया योग्य, विद्वान, संस्कारवान पुत्र पैदा होगा। यदि माता-पिता कुसंस्कारी होंगे तो धुंधकारी जैसा दुष्ट बालक उत्पन्न होगा।
इस मौके पर बृजेंद्र सिंह सेंगर, अवध बिहारी कौशिक, प्रकाश नारायण पुरोहित, आदित्य तिवारी, विशंभर दयाल खरे, रामबाबू बिदुआ, रामनारायण तिवारी, शारदा शरण पुरोहित, उमाकांत गुप्ता, हरनारायण गुप्ता, परमानंद चौरसिया, नंदकिशोर कुशवाहा, रामदास सेन, लक्ष्मीनारायण सेन, मेहरबान सिंह, रामस्वरूप प्रजापति, गजेंद्र यादव, शिवशंकर तिवारी, कृष्णकांत शास्त्री, राजकुमारी सिंह, रागनी, बृजकिशोर आदि उपस्थित रहे।

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